Friday, 23 December 2011











അമ്മമാര്‍ക്കുള്ള കമ്പ്യൂട്ടര്‍ പരിശീലനം
ദേവധാര്‍ ഗവ. ഹയര്‍ സെക്കന്ററി സ്കൂളില്‍ അമ്മമാര്‍ക്കുള്ള കമ്പ്യൂട്ടര്‍ പരിശീലനം വിജയകരമായി പുര്‍ത്തിയാക്കി.തികഞ്ഞ ആത്മ സംതൃപതിയോടെ അമ്മമാര്‍ നല്‍കിയ ഫീഡ് ബാക്ക് ചിട്ടയായ പരിശീലനത്തിന്റെ മറുമൊഴിയായി അധ്യാപികമാരായ ഗിരിജ കുമാരി.വി,ബിന്ദു.പി,കെ.ടി.പുഷ്പി എന്നിവര്‍ കണക്കാക്കുന്നു.തുടര്‍ പരിശീലനം എന്ന നിലയ്ക്ക് വരും നാലുകളിലെ ഒഴിവുദിനങ്ങള്‍ വിനിയോഗിക്കാനം തീരുമാനിച്ചാണ് പരിശീലന പരിപാടി താത്കാലികമായി പിരിച്ചുവിട്ടത്

Wednesday, 30 November 2011

Monday, 28 November 2011


आस्वादन टिप्पणी
वह तो अच्छा हुआ (भगवत रावत)

    समकालीन हिंदी कविता के श्रेष्ठ कवियों में एक, श्री भगवत रावत की बहुचर्चित कविता है-वह तो अच्छा हुआ। आधुनिक मानव की निर्ममता, संवेदनहीनता आदि उनकी कविता का मुख्य विषय है।उनकी कविता विशेष अर्थ में सामाजिक ,सांस्कृतिक विमर्श की कविता है।उन्होंने इस कविता में अपने समय की जटिलताओं का चित्रण किया है।
    कवि कहते है - नगर की संकरी गंदी गली में पैर फ़िसलकर गिरा हुआ बच्चा वहाँ पड़ा रो रहा था। वह गली तो गरीब लोगों की है, इसलिए ही उस गंदी गली का नाम नगरपालिका में नहीं था। वह गली इतनी संकरी थी कि बच्चे के गिर पड़ने से लोगों का वहाँ से होकर आना-जाना मुश्किकल हो गया।यदि कोई गंदगी में लिपटे बच्चे को गोद में उठाकर प्यार करे तो वह चुप हो जाएगा। लेकिन इसकी हिम्मत या फुरसत किसी को नहीं थी।
    कवि यहाँ वर्तमान समाज का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करते है।कोई किसी को भी सहारा न देकर भीड़ में अकेला हो रहा है।ऊपर से देखने पर वलगता है कि आधुनिक समाज में सभी मानव एक साथ मिलकर रहते हैं । लेकिन असलियत यह है कि उनके बीच कोई मानसिक निकटता नहीं है।सब अपने स्वार्थमय लक्ष्य की ओर त्वरित गति से चलने मात्र में उत्सुक है।
    कुछ लोग दूर से बच्चे को देख रहे थे। लेकिन उनका विचार यह था कि उस गरीब बच्चे को गोद में उठाने पर गंदगी फैलने के अलावा कोई फायदा नहीं।यहाँ कवि आधुनिक समाज की संवेदनहीनता की ओर संकेत करते हैं। सभी मानव मूल्यों के ऊपर धन को प्रतिष्ठित कर दया, सहानुभूति, संवेदनहीनता सब कुछ विस्मृत हो जाते है।
    वर्तमान परिस्थिति में एक बड़ा उद्योग बन गये समाचार पत्र और दृश्यमाध्यमों के सत्यभंग की और भी यहाँ कवि करारी चोट की है । आज की मीडिया किसी किसी भी त्रासदी को उत्सव बनानेवाले है।उन्हें ताजा समाचार मिलना ही काखी है।संप्रेषित समाचार की सचाई के बारे में उन्हें कोई चिंता नहीं।वास्तव में बच्चा गंदगी में पैर फिसलकर गिरा है।लेकिन अखबारवालों में बात इस तरह पहूँची कि किसी ने नगर की संकरी-गंदी गली में रोता हुआ बच्चा छोड़ दिया है।चैनलों के प्राचुर्य के बारे में भी यहाँ कवि संकेत करते है।
    एक कविता तभी समसामयिक मानी जाती है जब वह तत्कालीन समस्याओं का संबोधन करती है। "वह तो अच्छा हुआ " वर्तमान समाज की ज्वलंत समस्या पर लिखी गयी कविता है । उसकी अधिकाँश घटनाएँ आज के समाज में हमारे सम्मुख होनेवाली है।
    जिस गली में बच्चा गिरकर रो रहा था उसका नाम अगर नगरपालिका में उल्लिखित नही है तो इसका मतलब है कि वह गली उपेक्षा,निंदा औरक तिरस्कार का शिकार हो चुकी थी।"गली और संकरी हो जाती है" - इस प्रयोग से यह व्यक्त है कि पहले ही गली संकरी थी। इसका प्रमुख कारण विकास का अभाव था। "आ धमकना" - चैनलवालों के आने के तरीके को सूचित करता है। कवि यह संकेत करता है कि महापौर के शपथ समारोह के आगे एक गरीब छोकरे के गिर जाने का कोई मूल्य नहीं। कवि ने सौभाग्य -शब्द का प्रयोग भी व्यंग्य रूप से किया है।

Saturday, 26 November 2011

आदमी का बच्चा

Thursday, 29 September 2011

നിര്‍ഝര്‍

പഴയ പത്താം തരം ഹിന്ദി പാഠപുസ്തകത്തിലെ

ഡോ. രാംകുമാര്‍ വര്‍മ്മ രചിച്ച "നിര്‍ഝര്‍" എന്ന കവിതയുടെ മലയാള പരിഭാഷ

പരിഭാഷപ്പെടുത്തിയത്

( ഫ്രാന്‍സി.ബി, ജി.വി.എച്ച്.എസ്.എസ്-ഫോര്‍ ഗേള്‍സ്, പറവണ്ണ, തിരൂര്‍ )

നിര്‍ഝരി

Sunday, 25 September 2011

नजरें नजारें-तीसरी इकाई में प्रवेश करने के लिए कक्षा-X पन्ने में देखें..

Thursday, 1 September 2011

സ്കൂള്‍ കലോത്സവം 2011

പുതുക്കിയ മാനുവലിന് വേണ്ടി ക്ലിക്ക് ചെയ്യുക

ഓണാശംസകള്‍







Tuesday, 23 August 2011

ഒന്നാം ടേം മൂല്യനിര്‍ണയം













ഒന്നാം ടേം മൂല്യനിര്‍ണയത്തിനു വേണ്ടി ദേവധാര്‍ ഗവ. ഹയര്‍ സെക്കന്ററി സ്കൂള്‍,താനൂര്‍ & ഗവ. ഗേള്‍സ്‌ ഹയര്‍ സെക്കന്ററി സ്കൂള്‍ എന്നിവിടങ്ങളിലെ ഹിന്ദി അധ്യാപകര്‍ തയ്യാറാക്കിയ ചോദ്യ പേപ്പറുകള്‍ പരിശോധിക്കുമല്ലോ ?

Sunday, 14 August 2011



സ്വാതന്ത്ര്യ ദിനാശംസകള്‍

Saturday, 13 August 2011

चिडिया

जी.एच.एस.एस कुञ्ञिमंगलम के ऐ.टी - क्लब की ओर से नया प्रयास।



Thursday, 11 August 2011



1930 മാര്‍ച്ച് 12 ന്

ഗാന്ധിജിയുടെ നേതൃത്വത്തില്‍

ദണ്ഡി കടപ്പുറത്തേക്ക് നടത്തിയ

"ദണ്ഡിയാത്ര"യുടെ സ്മരണ പുതുക്കിക്കൊണ്ട്

താനൂര്‍ ദേവധാര്‍ ഗവ. ഹയര്‍ സെക്കന്ററി സ്കൂളിലെ

സോഷ്യല്‍ സയന്‍സ് ക്ലബ്ബിന്റെ ആഭിമുഖ്യത്തില്‍

വിദ്യാര്‍ത്ഥികള്‍

താനൂര്‍ കടപ്പുറത്തേക്ക്

"ദണ്ഡി സ്മൃതി യാത്ര" നടത്തുന്നു.



Friday, 5 August 2011

ബ്ലോഗ് സന്ദര്‍ശിക്കുന്നതില്‍ സന്തോഷിക്കുന്നു.ഗുണകരമായവ ഉപയോഗപ്പെടുത്തുന്നതിനോടൊപ്പം പ്രസിദ്ധീകരണത്തെക്കുറിച്ചുള്ള താങ്കളുടെ വിലയേറിയ അഭിപ്രായങ്ങള്‍ കമന്റിലൂടെ രേഖപ്പെടുത്തുവാന്‍ മറക്കരുതേ...

Thursday, 4 August 2011

सेहत की राह पर ............

चिकित्सा के क्षेत्र में होनेवोली अनीति के बारे में
" चैनलों " की ओर से एक खोज ।

Wednesday, 3 August 2011

महादेवी जी का पत्र



Thursday, 28 July 2011

HSSE RESULTS

Click here for

HSSE I st year results

Tuesday, 12 July 2011

प्यार और क्रूरता










आवाज़ उठाएँ..........

Sunday, 26 June 2011


2010-11 സാമ്പത്തിക വര്‍ഷത്തെ

ജി.പി.എഫ് ക്രഡിറ്റ് കാര്‍ഡിനു വേണ്ടീ

താഴത്തെ ലിങ്കില്‍ ക്ലിക്ക് ചെയ്യുക


GPF Annual Statement 2010-11

Friday, 24 June 2011

समकालीन किवता

समकालीन किवता युगीन यथार्थ और वास्तविकता को अभिव्यक्ति प्रदान
करती है।समकालीन किवयों ने सामाजिक अवयवसथा के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए
किवता को प्रगतिशील संकलप दिए। मोहभंग का शिकार हुए आम आदमी के अंदर की
पीडा, तनाव, विषमता आदि को सृजनातमक संस्पर्श पसतुत करने में, समकालीन किवता
का मर्म छिपा हआ है।ये कवि यथार्थ का दृष्टा-सृष्टा है।प्रकृति के प्रति इन कवियों ने
स्वस्थ दृष्टि अपनाई है। इन किवताओं मे पुराने मुल्यों के विघटन का चित्रण
है, वही विज्ञान के प्रभाव से नया विश्वास जन्म ले रहा है।

Saturday, 18 June 2011

Thursday, 9 June 2011

हम एक साथ चलें

ഹിന്ദി പാഠപുസ്തകവുമായി ബന്ധപ്പെട്ട കുറിപ്പുകള്‍ നമുക്ക് ഈ ബ്ലോഗില്‍ പ്രസിദ്ധീകരിക്കാം .നിങ്ങളുടെ കുറിപ്പുകള്‍ അയച്ചു തരിക

Friday, 3 June 2011

പ്രീ-മെട്രിക് സ്കോളര്‍ഷിപ്പ് 2011-12

Instructions

Appication Form

Sunday, 29 May 2011

हिंदी मंत्रणसभा,कोट्टारक्करा: गौरा-रेखाचित्र सिखाने केलिए सहायक सामग्री

हिंदी मंत्रणसभा,कोट्टारक्करा: गौरा-रेखाचित्र सिखाने केलिए सहायक सामग्री

कविता में बिंब और प्रतीक

प्रतीक

प्रतीक का सामान्य अर्थ है-संकेत चिह्न।इसका प्रयोग किसी अन्य अर्थ के स्थान पर किया जाता है।

जब कोई पदार्थ किसी भाव या विचार का संकेत बना जाता है तो प्रतीक कहलाता है।

उदा ः कबीर की रचनाओं में 'हंस' आत्मा का प्रतीक बनकर आया है।

प्रतीक के तीन वर्ग है-

.संकेतात्मक २.अभिव्यंजनात्मक ३.आरोपमूलक ।

इनमें आरोपमूलक प्रतीक दो प्रतीकों के वास्तविक रूप का प्रतिनिधित्व करता है।साहित्य में कथ्य को आकर्षक बनाना ही प्रतीक का मूल उद्देश्य है।

बिंब

शब्दों के माध्यम से निर्मित चित्र को बिंब कहते है।यह कल्पना-निर्मित और भाव-गर्भित होती है।इसकी पाँच विशेषताएँ मानी जाती है।

.चित्रात्मकता २.शिल्प रूपात्मकता ३.ऐन्द्रिकता ४.भावोत्पादकता ५.अप्रस्तुत के सन्निवेश का अभाव।

मानवेन्द्रियों को भावोद्वेलित करना ही बिंब का प्रमुख उद्देश्य है।बिंब का सामान्य अर्थ किसी पदार्थ को मूर्तरूप प्रदान करता है।कल्पना के उन्मेष से कवि काव्य बिंब का निर्माण करता है।

Thursday, 26 May 2011

प्रकृति से प्रेम करें...............

कफन

कविता

बुनता है कफन आज का मानव,

मरते रहे प्रकृति-माँ को ओढ़ाने,

पी चुका दूध इस धरती के थन से

अब पी रहा है निण भी उसका।

पंजर बनाकर छोडेंगे उसे

लूटकर उसके सारा रस,

क्यों करता यह निष्ठूर काम

इतनी करुणामयी प्रकृति की ओर।

काट दिए सारे पेड़ जो देते छाया

इस करुणामयी प्रकृति माँ को।

लूट लिया सारा शुद्ध जल भी,

जो देती शीतलता इस मिट्टी को।

मलिन कर दिया वायु को भी

घुसाकर उसमें धुआँ और धूल।

नष्ट किया मन की शांति भी

कर्ण कठोर शोर और कोलाहल से।

हे प्रकृति माँ क्या, खो गया तुम्हारा

वह स्वच्छ सुन्दर ओजपूर्ण यौवन

बना दिया वे, तुम्हें वृद्धा और रोगी

फिर नहीं मन में आर्द्रता और दया तेरी ओर।

आज बुना रहा है कफन आज का मानव

मरणासन्न तुम्हें पहनाने.....

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मारगरट.पी.

जी एच एस एस-निऱमरुतूर

मलप्पुरम जिला

प्रोक्तियाँ


उपन्यास और उपन्यासिका


उपन्यास मानव जीवन की गाथा है।इसमें विभिन्न पात्रों के द्वारा एक ठोस कथानक क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाता है।उपन्यास की तुलना मानव शरीर से किया जाता है।शरीर की रीढ़ की हड्डी उपन्यास की कथा है, रीढ़ के आस पास की हड्डियों के जाल तथा अंग उपन्यास के पात्र हैं।शरीर के मज्जा और मांस पात्रों के अनुभव तथा अनुभूतियाँ हैं।रक्त उपन्यास का जीवन है।


उपन्यासिका उपन्यास का छोटा रूप है।इसमें भी एक ठोस कथानक होता है,उपन्यास की तरह विभिन्न पात्र होते हैं।उपन्यास की तरह फैलाव तथा निरूपण वैविध्य उपन्यासिका में नहीं।उपन्यास की कथा विकासमान और बहु आयामी तथा जीवन यथार्थ से जुडी हुई होती है।उपन्यास के लिए दिक् और काल का विस्तृत आयाम आवश्यक है।

उपन्यासिका की कहानी इकहरी होगी और उसमें काल का आयाम तो होगा,पर दिक् का फैलाव नहीं होगा।वर्णन विरलता,पात्रों की सीमित संख्या,विचार और चिंतन में मितव्ययता तथा मनोवैज्ञानिक गहराई में प्रवेश करने की प्रवृत्ति इसकी पहचान होती है।



कहानी और लंबी कहानी


कहानी में दिक् और काल के आयाम में कथानक का विकास होता है।एकसूत्रता सघन बुनावट और प्रभावान्विति इसके गुण है।ये सारे गुण लंबी कहानी में भी है।लंबी कहानी में कहानी की अपेक्षा विस्तृत वर्णन होता है।


कहानी में संवेदना या तनाव का कोई एक क्षण चित्रित होता है।लंबी कहानी में संवेदना या तनाव का क्षण विस्तृत होता है।तनाव कुछ ज्यादा समय तक रहता है।




वार्तालाप और साक्षात्कार


वार्तालाप


अनौपचारिक रीति से चलनेवाली एक प्रक्रिया है-वार्तालाप।यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग है।इसमें औपचारिकता के लिए कोई स्थान नहीं।यह पूर्व निश्चित भी नहीं।वार्तालाप में अक्सर वाक्य के स्थान पर वाक्यांशों का प्रयोग होता है।


साक्षात्कार


साक्षात्कार एकदम औपचारिक है।इसके लिए पूर्व तैयारी की आवश्यकता पड़ती है।किसी प्रमुख व्यक्ति से किसी विशेष अवसर पर साक्षात्कार किया जाता है।इसके लिए प्रश्नावली पहले तैयार की जाती है।साक्षात्कार देनेवाले व्यक्ति उनके कार्यक्षेत्र आदि के बारे में थोड़ी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही प्रश्नावली तैयार की जाती है।


संपादकीय और रपट


संपादकीय


किसी समाचार पत्र या पत्रिका के वरिष्ठ संपादक द्वारा संपादकीय लिखा जाता है।समकालीन समाज के बहुचर्चित और गंभीर विषय पर संपादकीय लिखा जाता है।संपादकीय से अमुक समाचार पत्र या पत्रिका का दृष्टिकोण प्रतिफलित होता है।


रपट


रपट दैनिक घटनाओं के आधार पर लिखी जाती है।रपट में घटना संबंधी निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर ज़रूर होना हैं।

क्या ? कब ? कौन ? क्यों ? कहाँ ? कैसे ?

रपट में शीर्षक पर ध्यान देना है।शीर्षक की आकर्षकता रपट की विजय बन जाती है।शीर्षक ऐसा हो जिससे पाठकों के दिल में रपट पढ़ने की उत्सुकता बढ़ जाय।



आत्मकथा और डायरी


अपने जीवनानुभवों को क्रमबद्ध रूप से लिखना आत्मकथा है।यह कहानी शैली में लिखी जाती है,पर इसमें कल्पना के लिए स्थान नहीं।ईमानदारी इसका प्रथम गुण है।


डायरी में प्रतिदिन के निरीक्षणों ,अनुभवों और कार्यों का ब्योरा लिखा जाता है।उसमें निजी विचारों , भावों और विकारों की प्रधानता होती है।

डायरी और आत्मकथा में मुख्य अंतर यह है कि डायरी में प्रतिदिन के ताज़े अनुभव लिखे जाते है जब कि आत्मकथा में सुसंबद्ध ढंग से अतीत की घटनाओं और अनुभवों को चुनकर लिखा जाता है।


प्रतीक और बिंब


जब कविता में कोई वस्तु इस तरह प्रयुक्त की जाती है,वह किसी दूसरी वस्तु की व्यंजना या संकेत करे तो प्रतीक कहते है।

जब कविता की शब्द योजना से किसी दृश्य या वस्तु या व्यक्ति का चित्र हमारे मन में साकार रूप से उभरे तो उसे बिंब कहते है।

बिंब में संवेदना अपने तात्कालिक रूप में होती है,पर प्रतीक में संवेदना देर तक रहती है।बिंब जिस वस्तु का होगा उसी के आंतरिक और बाह्य स्वरूप के सघन और गतिशील रूप का उद्घाटन होगा।लेकिन प्रतीक प्रस्तुत वस्तु से अधिक भिन्न किसी और बात का संकेत करता है।



संगोष्ठी



संगोष्ठी लोगों का सम्मिलन है जिसमें किसी विषय पर विमर्श किया जाता है।एक विशाल श्रोतागण के सामने किसी विषय पर वक्तव्य देना संगोष्ठी है।संगोष्ठी से किसी विषय को विभिन्न नज़रिए से देखने समझने का अवसर मिलता है।ज्ञानार्जन के साथ साथ भाषा पर क्षमता बढ़ाने का भी अवसर संगोष्ठी द्वारा प्राप्त होता है।

कक्षा में संगोष्ठी का विषय देने के साथ विषय पर छात्रों का पूर्वज्ञान परखने के लिए एक चर्चा चलाना अच्छा होगा।फिर अध्यापक की तरफ से एक छोटी-सी भूमिका देनी है।एक निश्चित समय देकर उसके अंदर संगोष्ठी आलेख करने का निर्देश दें।छात्र अपने दल में विषय को उपविषयों में बाँटकर,उन उपविषयों पर जानकारी एकत्र करें।ग्रूप में छोटे आलेखों को परिमार्जित कर संगोष्ठी का आलेख बनाएँ।

Tuesday, 24 May 2011

उपन्यास और उपन्यासिका


उपन्यास मानव जीवन की गाथा है।इसमें विभिन्न पात्रों के द्वारा एक ठोस कथानक क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाता है।उपन्यास की तुलना मानव शरीर से किया जाता है।शरीर की रीढ़ की हड्डी उपन्यास की कथा है, रीढ़ के आस पास की हड्डियों के जाल तथा अंग उपन्यास के पात्र हैं।शरीर के मज्जा और मांस पात्रों के अनुभव तथा अनुभूतियाँ हैं।रक्त उपन्यास का जीवन है।


उपन्यासिका उपन्यास का छोटा रूप है।इसमें भी एक ठोस कथानक होता है,उपन्यास की तरह विभिन्न पात्र होते हैं।उपन्यास की तरह फैलाव तथा निरूपण वैविध्य उपन्यासिका में नहीं।उपन्यास की कथा विकासमान और बहु आयामी तथा जीवन यथार्थ से जुडी हुई होती है।उपन्यास के लिए दिक् और काल का विस्तृत आयाम आवश्यक है।

उपन्यासिका की कहानी इकहरी होगी और उसमें काल का आयाम तो होगा,पर दिक् का फैलाव नहीं होगा।वर्णन विरलता,पात्रों की सीमित संख्या,विचार और चिंतन में मितव्ययता तथा मनोवैज्ञानिक गहराई में प्रवेश करने की प्रवृत्ति इसकी पहचान होती है।